Etah News : रोज-रोज बिजली की रोस्टिंग, आखिर कब जागेगा विद्युत विभाग?

2 महीने से लगातार हो रही रोस्टिंग ने खोली सरकार के दावों की पोल

एटा के गंगनपुर 220/132 केवी विद्युत पारेषण उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की समस्या अब महज कुछ घंटों की परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह पिछले करीब दो महीनों से लगातार बनी हुई समस्या का रूप ले चुकी है। कभी दो घंटे तो कभी चार घंटे की रोस्टिंग के कारण आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर कब तक जनता बिजली विभाग की इस अव्यवस्था का खामियाजा भुगतती रहेगी?

20 अगस्त को जारी रोस्टिंग अपडेट के अनुसार गंगनपुर उपकेंद्र से संबंधित विद्युत आपूर्ति रात 8:40 बजे से दो घंटे के लिए रोस्टिंग की गई और रात 10:40 बजे तक आपूर्ति बहाल होने की संभावना जताई गई। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई ‘कोड’ प्राप्त होता है तो आपूर्ति तत्काल बहाल की जा सकती है। विभाग ने असुविधा के लिए खेद भी व्यक्त किया, लेकिन जनता के लिए सवाल केवल खेद जताने का नहीं, बल्कि स्थायी समाधान का है।

पिछले दो महीने से लगातार कभी दो घंटे और कभी चार घंटे बिजली कटौती होना यह दर्शाता है कि विद्युत व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर कमी है। यदि किसी उपकेंद्र या मशीन की क्षमता पर्याप्त नहीं है, तो आखिर उसे अपग्रेड क्यों नहीं किया जा रहा? यदि बड़ी मशीन की आवश्यकता है तो उसे लगाने में देरी क्यों हो रही है? और यदि इसके लिए सरकार से बजट की आवश्यकता है तो विद्युत विभाग शासन को प्रस्ताव भेजकर धनराशि उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीर प्रयास क्यों नहीं करता?

बिजली आज विलासिता नहीं, बल्कि आम आदमी की मूलभूत जरूरत है। घरों में पानी की मोटर, पंखे, कूलर, फ्रिज और अन्य उपकरण बिजली पर निर्भर हैं। किसान सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार करते हैं, दुकानदारों का कारोबार बिजली से जुड़ा है और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। गर्मी के मौसम में लंबे समय तक बिजली कटौती बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए और अधिक परेशानी पैदा करती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विद्युत विभाग को इस समस्या की जानकारी नहीं है? यदि जानकारी है तो अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ? क्या विभाग केवल रोस्टिंग का संदेश जारी करके अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है?

जनता को यह जानने का अधिकार है कि समस्या का वास्तविक कारण क्या है, इसे दूर करने के लिए क्या योजना बनाई गई है और स्थायी व्यवस्था कब तक तैयार होगी। सरकार यदि हर घर तक बिजली पहुंचाने और बेहतर विद्युत आपूर्ति का दावा करती है तो जमीन पर उसकी तस्वीर भी दिखाई देनी चाहिए।

जनता को रोस्टिंग की सूचना नहीं, नियमित और भरोसेमंद बिजली चाहिए। अब समय आ गया है कि विद्युत विभाग और शासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए बड़ी क्षमता की मशीन, आवश्यक तकनीकी संसाधन और स्थायी व्यवस्था उपलब्ध कराए। आखिरकार जनता सवाल पूछ रही है—हर दिन बिजली की आंख-मिचौली कब खत्म होगी और जिम्मेदार अधिकारी कब जवाब देंगे?

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