कासगंज। विकास के दावों और सरकारी योजनाओं की चमक के बीच कासगंज जनपद के गांव नगला भुजपुरा की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। गांव के लोगों का आरोप है कि विद्युत सुदृढ़ीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च तो कर दिए गए, लेकिन ग्रामीणों को आज भी अंधेरे और लो-वोल्टेज की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बाहर नया ट्रांसफार्मर तो स्थापित कर दिया गया, लेकिन मानकों के अनुसार चार-फेस (4-कोर) लाइन बिछाने के बजाय कथित तौर पर दो-फेस लाइन जोड़ दी गई। इसका परिणाम यह हुआ कि पूरे गांव में बिजली की आपूर्ति प्रभावित हो गई। घरों के पंखे मुश्किल से चल रहे हैं, पानी की मोटरें बंद पड़ी हैं और भीषण गर्मी में लोग रातें जागकर काटने को मजबूर हैं।
सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को हो रही है। दिनभर की तपती गर्मी के बाद जब लोग राहत की उम्मीद लेकर घर लौटते हैं, तो उन्हें कमजोर बिजली और घुटन भरी रातों का सामना करना पड़ता है। गांव के किसानों का कहना है कि बिजली की समस्या के कारण उनका दैनिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब गांव के लोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई तथा मानकों के अनुरूप नई विद्युत लाइन बिछाने की मांग की है।
नगला भुजपुरा के ग्रामीणों की पीड़ा सिर्फ बिजली की नहीं, बल्कि उस उम्मीद की भी है जो उन्होंने विकास योजनाओं से लगाई थी। उनका सवाल सीधा है—जब सरकार गांवों को रोशन करने की बात करती है, तो आखिर उनके हिस्से में अंधेरा क्यों आया?

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