चीनी की मिठास ने बिगाड़ा रसोई का बजट महंगाई से गरीब परिवार परेशान

रसोई का हिसाब बिगड़ा, चाय में भी कटौती; त्योहारों से पहले बढ़ी लोगों की चिंता


राजा का रामपुर। कस्बे में इन दिनों चीनी के बढ़ते दामों ने आम परिवारों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा की जरूरत में शामिल चीनी महंगी होने का सबसे अधिक असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। पहले से महंगाई की मार झेल रहे परिवार अब घरेलू खर्च में कटौती करने को मजबूर हैं। कुछ लोगों का कहना है कि चीनी महंगी होने के बाद उन्होंने चाय की मात्रा कम कर दी है, जबकि कुछ परिवारों ने खर्च बचाने के लिए चाय पीना तक छोड़ दिया है।
स्थानीय उपभोक्ताओं के मुताबिक, पिछले कुछ समय से आटा, दाल, खाद्य तेल, सब्जियों समेत रोजमर्रा की कई वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। इससे परिवारों का मासिक बजट पहले ही दबाव में है। अब चीनी के बढ़ते दामों ने रसोई का खर्च और बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि चाय में इस्तेमाल होने वाली थोड़ी-सी चीनी का खर्च भी पूरे महीने में जोड़ने पर घरेलू बजट पर असर डालता है।
छोटी-छोटी बचत से घर चलाने की कोशिश
महंगाई का असर सबसे अधिक सीमित आय वाले परिवारों में दिखाई दे रहा है। ऐसे परिवार जरूरी खर्चों में कटौती कर किसी तरह घर का बजट संभालने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों के अनुसार, पहले जहां दिन में कई बार चाय बनती थी, अब उसकी संख्या कम कर दी गई है। वहीं कई परिवारों ने चीनी की खपत घटाने के लिए चाय में चीनी की मात्रा भी कम कर दी है।
लोगों का कहना है कि आमदनी सीमित होने के कारण रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजों के दाम बढ़ने का असर सीधे पूरे महीने के खर्च पर पड़ता है।
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
आगामी दिनों में रक्षाबंधन, नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार आने वाले हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और चीनी से तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को आशंका है कि मांग बढ़ने पर कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
परिवारों का कहना है कि त्योहारों की खरीदारी के लिए पहले से बजट तय रहता है। ऐसे में आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से अतिरिक्त खर्च उठाना मुश्किल हो सकता है।
बाजार में कीमतों की निगरानी की मांग
स्थानीय उपभोक्ताओं ने प्रशासन से बाजार में चीनी की कीमतों की नियमित निगरानी कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि आवश्यक खाद्य वस्तु होने के कारण चीनी की बिक्री में मनमाने दाम वसूलने, जमाखोरी या कालाबाजारी जैसी शिकायतों पर संबंधित विभाग को नजर रखनी चाहिए।
उपभोक्ताओं ने बाजार में चीनी की उपलब्धता और बिक्री दरों की जांच कर उचित दर पर उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग की है।
मध्यम वर्ग भी महंगाई से प्रभावित
चीनी के बढ़ते दामों का असर केवल गरीब परिवारों तक सीमित नहीं है। मध्यमवर्गीय परिवार भी लगातार बढ़ते घरेलू खर्च को लेकर चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि जब एक-एक करके रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं तो महीने के अंत तक इसका बड़ा असर सामने आता है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर प्रभावी निगरानी रखते हुए उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के प्रयास करने चाहिए।


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