Lakhimpur Kheri: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ीं सरकारी योजनाएं: सुजानपुर में गोवंश बेहाल, कागजों पर हो रहा विकास


LAKHIMPUR KHERI: 
डबल इंजन सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और गोवंश संरक्षण के दावों की पोल लखीमपुर खीरी जिले में खुलती नजर आ रही है। विकास खंड रमिया बेहड़ की ग्राम पंचायत सुजानपुर में सरकारी योजनाएं पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं। आलम यह है कि गोशालाओं में गोवंश नर्क जैसी स्थिति में जीने को मजबूर हैं और विकास केवल सरकारी कागजों पर दौड़ रहा है।

गोशालाओं में मची है लूट, गोवंश की हालत दयनीय

ग्राम पंचायत सुजानपुर में संचालित गोशाला में व्यवस्थाओं के नाम पर सिर्फ लूट-खसोट चल रही है। बेजुबान गोवंश के लिए हरे चारे तक का कोई इंतजाम नहीं है। भूख और बदहाली के कारण गोवंश की हालत बेहद खराब है, जो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है। 

शिक्षा मित्र चला रहे प्रधानी, कागजों पर बंट रहा सरकारी धन

ग्रामीणों का आरोप है कि सुजानपुर में प्रधानी का काम असल में प्रधान प्रतिनिधि विकास श्रीवास्तव चला रहे हैं, जो कि सुजानपुर प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा मित्र के पद पर तैनात हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर सिर्फ कागजों का मेंटेनेंस कर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है। 

इस पूरे भ्रष्टाचार में ग्राम पंचायत सचिव विनीत बार्नवाल और प्रधान प्रतिनिधि की कथित रूप से बराबर की हिस्सेदारी बताई जा रही है। 

इन योजनाओं में हुआ भारी फर्जीवाड़ा

ग्रामीणों और लाभार्थियों से जब जमीनी हकीकत जानी गई, तो पता चला कि निम्नलिखित योजनाओं का लाभ सिर्फ कागजों तक सीमित है:

स्वच्छ भारत मिशन सोक पिट गड्ढे और घूर गड्ढों का निर्माण सिर्फ फाइलों में हुआ है।

निर्माण व मरम्मत नाली निर्माण और इंडिया मार्का हैंडपंपों नल की मरम्मत के नाम पर भी खेल किया गया है

शौचालय व आवास व्यक्तिगत शौचालय, सामुदायिक शौचालय और गरीबों को मिलने वाले पीएम सीएम आवास का लाभ भी वास्तविक लाभार्थियों की जगह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है

जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी

इस बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार और गोवंश की दुर्दशा के संबंध में जब ग्राम पंचायत सचिव विनीत बार्नवाल, प्रधान प्रतिनिधि और विकास खंड अधिकारी (BDO) रमिया बेहड़ से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो किसी ने भी फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। सभी जिम्मेदारों का रवैया एक जैसा ही नजर आ रहा है, जिससे मिलीभगत का अंदेशा और भी पुख्ता होता है।


*अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर बेहाल गोवंश और भ्रष्टाचार की मार झेल रहे सुजानपुर के ग्रामीणों को कब तक न्याय दिला पाते हैं, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा*

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